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जानिए, आयुर्वेद और वैदिक ज्योतिष के बीच का वैदिक सम्बन्ध !

Rochak Khabare
04, Nov 2017, 11:32

673 492 इंटरनेट डेस्क: भारत देश का एक शानदार अतीत है, जिसपर सभी भारतीयों को गर्व है। लेकिन हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की महिमा और प्रतिभा जो अभी भी दिखाई देती है वह 1500 से 500 ईसा पूर्व के बीच की सबसे अधिक थी जिसे वैदिक युग के नाम से जाना जाता है। इस अवधि को ज्ञान काल कहा जाता है क्योंकि यह माना जाता है कि संसार में एक व्यक्ति जिस भी ज्ञान को प्राप्त करना चाहता है, वह चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में है। इन चार वेदों में कई महान संतों द्वारा प्रदान किया गया ज्ञान बताया गया है, जिन्होंने सभी विज्ञानों के लिए एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण पेश किया है। वेदों ने आयुर्वेद और वैदिक ज्योतिष के माध्यम से सभी जीवित प्राणियों के महत्व पर बल दिया है। आयुर्वेद हमें स्वस्थ रहने में मार्गदर्शन प्रदान करता है और यह हमें हमारे शरीर को अच्छी तरह समझने में सहायता करता है। दूसरी ओर, वैदिक ज्योतिष, हमारी नियति और उन सभी कारकों को समझने में हमारी मदद करता है जो हमारी भावनाओं और चरित्र को प्रभावित करते है। हालांकि हमें यह पता है कि ये दोनों मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ सम्बंधित होते है लेकिन सच्चाई ये है कि ये दोनों एक दूसरे को भी प्रभावित करते है। आयुर्वेद और ज्योतिष के बीच संबंध #8211; कुछ विद्वानों ने आयुर्वेद को पांचवा वेद माना है। आयुर्वेद आपके शरीर के प्रकार या दोषों ( कफ, वात या पित्त) की समझ पर जोर देता है और उसी के अनुकूल  जीवनशैली का पालन करता है। यह प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और सही आहार की मदद से बीमारियों को दूर रखने का एक सरल सिद्धांत है। ऋगवेद से दुनिया में ज्योतिष (ज्योतिष विद्या) की शुरुआत हुई थी। प्रकाश का विज्ञान ज्योतिष, ग्रहों की गति के बारे में बताता है और किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व लक्षणों पर इसके प्रभाव को दर्शाता है। नौ ग्रहो में से प्रत्येक ग्रह जो व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है, वह व्यक्ति के शरीर के कुछ अंगो जुड़ा हुआ होता है। अगर ये ग्रह व्यक्ति की जन्मकुंडली में लाभकारी स्थिति में होते है, तो ये अच्छे स्वास्थ्य की व्याख्या करेंगे और यदि ये दोषपूर्ण स्थिति में है तो वे रोग या चोटों का कारण बन सकते है। इस प्रकार, आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों ही एक दूसरे से जुड़े हुए है और एक शरीर (ज्योतिष) में उत्पन्न होने वाली समस्याओं और इनको कम करने के लिए अपने जाने वाली सही जीवन शैली का पालन करने के लिए (आयुर्वेद) को एक साथ समझा जाना चाहिए। तीन दोष, कफ, वात और पित्त क्रमशः पृथ्वी और पानी, हवा और आग तत्वों के अनुरूप हैं। और ठीक इसी प्रकार बारह राशि चक्र के संकेत उन तत्वों के आधार पर चार घरों में विभाजित है। इस प्रकार वायु तत्व मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि का प्रतिनिधित्व करता है और ग्रहों बुध, शनि, शुक्र (द्वितीयक) और राहु द्वारा प्रभावित होता है। जब किसी बीमारी से ग्रस्त कोई व्यक्ति राहत के लिए एक आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाता है, तो चिकित्सक पहले व्यक्ति के दोष खोजता है और फिर इस रोग को दोष से जोड़ता है। वह तब व्यक्ति की जन्म कुंडली की जांच कर के इसके लिए जिम्मेदार ग्रह का पता लगाता है। उदाहरण के लिए, मन का प्रतिनिधित्व करने वाला चंद्रमा किसी की कुंडली में लापरवाह स्थिति में है, तो इसका परिणाम अनिद्रा, मतिभ्रम, पानी या जानवरों के डर के रूप में होगा। जबकि एलोपैथी दवाओं के साथ इसका इलाज कर सकता है, आयुर्वेद इनके उपचार के लिए एक प्राकृतिक उपाय बताएगा। एक सुखी जीवन जीने के लिए व्यक्ति को अपने शरीर के काम (आयुर्वेद) को समझना चाहिए और उसका उद्देश्य अपने सांसारिक रूप (ज्योतिष) में पूरा करने के लिए आया है। वेद हमें सिखाते है कि ब्रह्मांड हमें कैसे प्रभावित करता है और हम इसे कैसे बुद्धिमानी से कैसे समझ सकते है। The post जानिए, आयुर्वेद और वैदिक ज्योतिष के बीच का वैदिक सम्बन्ध ! appeared first on न्यूज फिलर.

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