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इस यंत्र की पूजा से चमक जाएंगी आपकी किस्मत

Rochak Khabare
09, Nov 2017, 08:01

ज्योतिय डेस्क। भगवान शिव यंत्र (महामृत्युंजय यंत्र) मानव जीवन के लिए अभेद्य कवच है, बीमारी की अवस्था में एवं दुर्घटना इत्यादि से मृत्यु के भय को नष्ट करता है और शारीरिक पीड़ा के साथ मानसिक पीड़ा से भी छुटकारा मिलता है। शिव यंत्र को महामत्युंजय यंत्र के नाम से जाना जाता है। यह यंत्र उच्चकोटि का दार्शनिक यंत्र है जिसमें जीवन एवं मृत्यु का रहस्य छिपा हुआ है। महामत्युंजय यंत्र चल-अचल दोनों ही तरह से प्राण प्रतिष्ठित किया जा सकता है। महामत्युंजय यंत्र एवं मंत्र का उपयोग, एक सात्विक प्रयोग है, अतः इससे सिर्फ लाभ ही लाभ होता है। शरीर रक्षा के साथ बुद्धि, विद्या, यश और लक्ष्मी भी बढ़ती है। महामत्युंजय मंत्र एवं यंत्र, मंत्रों एवं यंत्रो में श्रेष्ठ है। यह अत्यंत फलदायी है क्योंकि इसका संबंध सीधा देवाधिदेव भगवान शिव से है और भगवान शिव अपने आप में सिद्ध हैं।
size-medium 88312 w, , 1022w (max-: ) इस यंत्र का प्रयोग असाध्य रोगों, मृत्यु तुल्य कष्टों एवं अचानक आने वाली दुर्घटनाओं से बचाव के लिए तो किया ही जाता है इसके अलावा जन्म कुंडली के कष्टकारक ग्रहों और पीडादायक दशा-अर्न्तदशा में शुभ फल देता है। इष्टजनों के वियोग, भाई-बन्धुओं से विद्रोह, दोषारोपण, कलंक, मन में उदासी, धनाभाव, कोर्ट कचहरी आदि कष्टों में यह कारगर है। विवाह मेलापक में नाडी दोष, षड़ाष्टक (भकूट) दोष और मंगली दोष निवारण में भी यह उपयोगी है। जीवन में अनावश्यक दबाव और मानसिक तनाव में से राहत देता है। महामत्युंजय यंत्र की पूजा साधना के पश्‍चात इसे घर में रखें। इस यंत्र को गाड़ी वाहन आदि में भी रख सकते हैं। इस यंत्र को षिव कवच के रुप में गले में धारण कर सकते है।
size-medium 88315 w, , 1022w (max-: ) इस खास यंत्र की साधना ऐसे करें महामृत्युंजय यंत्र की साधना सोमवार को शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। श्रावण मास में साधना व पूजा करना विशेष फलदायी होता है क्योकि, श्रावण मास भगवान षिव को अत्यंत प्रिय है। इस मास की पूर्णिमा को श्रवण नक्षत्र होता है। श्रवण नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है, जो शिव को प्रिय है।

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