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इंडिया ने ब्रिटिश कोर्ट से कहा-भारतीय जेल में विजय माल्या को खतरा नहीं

Rajasthan Patrika
14, Nov 2017, 05:30

नई दिल्ली: शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण केस की सुनवाई अगले महीने होने वाली है। 4 दिसंबर को ब्रिटिश कोर्ट में माल्या के प्रत्यर्पण पर सुनवाई होगी। लेकिन पिछले दिनों सुनवाई के दौरान विजय माल्या के वकील ने आशंका जाहिर की थी भारत की जेलों की स्थिति बेहद खराब है। वहां रहना मुश्किल भरा है। इस संदर्भ में गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक की । जिसमें कहा गया कि 9000 करोड़ रुपए के डिफॉल्टर विजय माल्या को भारत की जेल में कोई खतरा नहीं होगा। माल्या को जेल में नहीं होगी दिक्कतकेंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में हुई हाईलेवल मीटिंग में फैसला लिया गया है कि माल्या को जेल में किसी का खतरा नहीं होगा। भारत सरकार इस सिलसिले में लंदन के वेस्टमिंस्टर मैजिस्ट्रेट्स कोर्ट को यह अवगत कराया गया कि माल्या को जेल में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। बैठक में ब्रिटेन की अदालत में दायर की जाने वाली प्रतिक्रिया पर विचार-विमर्श किया गया। जिसमें माल्या की आशंका को खारिज कर दिया गया कि वह भारतीय जेल में सुरक्षित नहीं है।दरअसल विजय माल्या के वकील ने ब्रिटिश अदालत में भारत की जेल की बदतर हालात का हवाला देते हुए कहा था कि वहां रहना मुश्किल है। ऑर्थर रोड जेल में रखा जाएगा माल्या को गौरतलब है कि वहीं केंद्र सरकार की ओर से राज्य की राजधानी स्थित मुंबई के आर्थर रोड जेल को प्राथमिक सूची में रखा है। भारत सरकार ने यूके की अथॉरिटी को इस बात का भरोसा दिलाया है कि बैंकों से करीब 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर फरार होने वाले विजय माल्या को मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में रखा जाएगा। सरकारी अधिकारी ने बताया, पूर्व यूनियन होम सेक्रटरी ने यूके की सरकार को जुलाई में बताया कि भारत की जेलों में भी यूके की जेल जैसी ही व्यवस्था है, जेलों में मेडिकल सुविधा और हॉस्पिटल भी है। बुकी संजीव चावला का प्रत्यर्पण से किया गया था इंकार दरअसल यूके की वेस्टमिन्स्टर कोर्ट भारतीय जेल की खराब हालात को देखते हुए बुकी संजीव चावला के प्रत्यर्पण से इनकार कर दिया था। इस फैसले के बाद माल्या को भी अपना केस मजबूत होता दिख रहा है। 2000 से मैच फिक्सिंग के आरोप में फंसे चावला ने कोर्ट में दलील दी थी कि भारत में तिहाड़ जेल की हालत बेहद खराब है, उसे वहां भेजा जाना मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा। अब यही दलील देकर माल्या भी फैसले को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

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