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वो राइटर, जिसने 72 कहानियां लिखी, जिनको शतरंज खेलने का शौक था

Live India
15, Nov 2017, 02:31

userfiles1111111111(7).jpg हालांकि इन्होंने अपनी रचनाओं में नाटक सबसे ज्यादा लिखे हैं। वह युग प्रवर्तक नाटककार थे। इन्हें कामायनी पर मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ। आपको जानकार हैरानी होगी कि इन्होंने 48 सालों के छोटे जीवन में ही हिन्दी की सभी विद्याओं पर रचनाएं लिखी।
userfiles22222222(18).jpg 30 जनवरी 1889 को काशी में जन्में जयशंकर प्रसाद की सबसे बड़ी खासियत ये है कि वे गम्भीर प्रकृति के व्यक्ति थे। वे नागरी प्रचारिणी; सभा के उपाध्यक्ष भी थे। इनका जन्म प्रतिष्ठित सुंधनी साहू नाम के प्रसिद्ध वैश्य परिवार में हुआ था। इनके पिताबापू देवी प्रसाद; कलाकारों का आदर करने के लिए विख्यात थे। जयशंकर प्रसाद जब छोटे थे तब ही उनके पिता का निधन हो गया था। जब वह बड़े हुए तो मां और भाई उन्हें अकेला छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह गए। मां-बाप और बड़े के देहांत के बाद मात्र 17 साल की उम्र में ही जयशंकर प्रसाद पर अनेक जिम्मेदारियां आ गई। परिवार के कुछ लोग इनकी पूरी संपत्ति हड़पना चाहते थे, लेकिन सभी का सामना जयशंकर ने बड़े ही धैर्य और गंभीरता के साथ किया।
शिक्षा की बात की जाए तो उन्होंने पहले तो अपनी शिक्षा काशी के क्वींस कॉलेज से की, लेकिन संपत्ति हड़पने की चाल की वजह से उन्होंने घर से ही पढ़ाई करने की सोची। कुछ वक्त के बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और घर में ही अंग्रेजी, हिन्दी, बंगला, उर्दू, फारसी, संस्कृत आदि भाषाओं का गहन अध्यन किया। जयशंकर प्रसाद साहित्यिक प्रवृति के व्यक्ति थे, इतना ही नहीं वह महादेव के सबसे बड़े भक्त भी थे और मांस मदिरा से दूर रहते थे। इन्होंने अपने साहित्य साधना से हिन्दी को अनेक उच्चकोटि के ग्रन्थ-रत्न प्रदान किए। इन्होंने वेद, इतिहास, पुराण व साहित्य का गहन अध्ययन किया।

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