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घोटाले के आरोपी को पुलिस ने दो साल तक नहीं किया गिरफ्तार, चुनाव में 1.66 करोड़ रुपए खर्च करने का मामला

Rajasthan Patrika
15, Nov 2017, 05:00

दुर्ग . चुनाव में बेतहाशा खर्च को लेकर पुलिस ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के तत्कालीन सीईओ डीआर साहू समेत चार लोगों के खिलाफ अमानत में खयानत का अपराध दर्ज किया लेकिन दो वर्ष बाद भी उनको गिरफ्तार नहीं किया। अब आरोपियों ने एफआईआर को शून्य करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। आरोपी पुलिस की कार्रवाई को अनुचित बता रहे हैं। इधर हाईकोर्ट की मांग पर पुलिस ने अब तक की गई जांच की स्थिति को स्पष्ट करते हुए प्रतिवेदन के साथ डायरी भेज दी है। आरोपियों ने परिवाद में हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा है कि पुलिस ने जिस धारा के तहत एफआईआर दर्ज किया है वह गलत है। पुलिस ने अमानत में खयानत का मामला बनाया है। जबकि बैंक की राशि में किसी तरह की हेराफेरी हुआ नहीं है। चुनाव के समय जिस राशि का उपयोग किया गया था, वह राशि चुनाव के बाद वापस जमा कर दिया। इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कुछ माह पहले रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए बैंक के तत्कालीन सीईओ वीके गुप्ता ने पुलिस को जानकारी दी थी कि बैंक कि राशि में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। जिस राशि से चुनाव कराया था वह राशि जिले के सेवा सहकारी संस्थान ने लौटा दी है। गुप्ता ने प्रमाणित करते हुए दस्तावेज पुलिस को दिए। मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया था। आदेश को दुर्ग पुलिस ने यह कहते हुए बेमेतरा पुलिस को भेज दिया कि परिवाद प्रस्तुत करने वाला बेमेतरा जिला का है। बेमेतरा पुलिस ने घटना स्थल दुर्ग को मानते हुए एफआईआर को कहा। आखिर में दो माह बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने एफआईआर की। इस मामले में खास बात यह है कि बिलासपुर हाईकोर्ट के निर्देश पर ही दुर्ग पुलिस ने करोड़ रुपए के गड़बड़ी के मामले में बैंक के तत्कालीन सीईओ समेत चार लोगों के खिलाफ 2015 एफआईआर दर्ज किया। मामला दर्ज करने के बाद पुलिस आरोपियों को फरार बताती रही। फिर आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में टालमटोल करती रही। टीआई सिटी कोतवाली भावेश साव ने बताया कि वर्तमान में प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है। एफआईआर को शून्य करने के लिए परिवाद प्रस्तुत किया गया है। हमने डायरी को हाईकोर्ट भेजा है। डायरी भेजने के बाद हमारे पास किसी तरह की सूचना नहीं आई है। बेमेतरा जिला के श्याम बिहारी वर्मा ने हाईकोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया था कि जिला सहकारी बैंक के चुनाव में बेतहाशा खर्च किया गया है। एक ही बिल का उपयोग कई जगह किया गया है। बालोद, बेमेतरा व दुर्ग के विभिन्न सोसाइटी चुनाव में कुल करोड़ रुपए खर्च किया गया। जबकि अन्य जिले के चुनाव में हुए खर्च इसके मुकाबले बहुत कम है। बैंक के तत्कालीन सीईओ डीआर साहू व बैंक अधिकारी गोविन्द साहू सेण्डे व महिलांगे ने चुनाव को आय का जरिया बनाया। इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा भी जांच कर रही है।

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