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भारत की पहली महिला वकील को गूगल ने डूडल बना कर किया सम्मानित

Sanjeevni Today
15, Nov 2017, 05:20

नई दिल्ली।भारत की पहली महिला बैरिस्टर कार्नेलिया सोराबजी के 151वे जन्मदिन पर गूगल ने उन्हें एक अनोखा और शानदार डूडल समर्पित किया है। इस डूडल को जसज्योत सिंह हंस ने बनाया है। इस डूडल में इलाहाबाद हाई कोर्ट की तस्वीर भी है जहां से कॉर्नेलिया ने अपना प्रैक्टिस शुरू की थी। सोराबजी समाज सुधारक होने के साथ-साथ एक लेखिका भी थीं। कार्नेलिया का जन्म 15 नवंबर 1866 को नासिक में हुआ था। कार्नेलिया पहली भारतीय महिलाा थीं जिन्होंने 1892 में कानून की डिग्री हासिल की थी, यही नहीं वह पहली भारतीय महिला थीं जिन्होंने ब्रिटिश यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। कार्नेलिया 1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गईं और 1894 में भारत लौटीं। उस समय समाज में महिलाओं की स्थिति बहुत ही दयनीय थी। उस समय महिलाओं को वकालत तो दूर पढ़ाई करने का भी अधिकार नहीं था। ऐसे वातावरण में भी कार्नेलिया ने वकालत करते हुए एडवोकेट बनने का फैसला किया। यह भी पढ़े: वीडियो : वीडियो: सऊदी में फंसे इस युवक ने वीडियो जारी कर लगाई मदद की गुहार उन्होंने वकालत का काम शुरू करते हुए महिलाओं को कानूनी परामर्श देना शुरू किया और महिलाओं के लिए वकील का पेशा खोलने की मांग उठाई। आखिरकार 1907 के बाद कार्नेलिया को अपनी इस लड़ाई में जीत हासिल हुई। उन्हें बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम की अदालतों में सहायक महिला वकील का पद दिया गया। 1924 में करवाया कानून में बदलाव- एक लंबी लड़ाई के बाद 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून में बदलाव करवाया और महिलाओ को वकालत करने का अभिनकर मिला। 1929 में कार्नेलिया हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील के तौर पर सेवानिवृत्त हुईं। कार्नेलिया को आदर्श मान प्रेरणा लेते हुए महिलाएं आगे आईं और वे वकालत को एक पेशे के तौर पर अपनाकर अपनी आवाज उठाने लगीं। 1954 में हुआ निधन- 1954 में कार्नेलिया का 88 की उम्र में निधन हो गया, पर आज भी उनका नाम वकालत जैसे जटिल और प्रतिष्ठित पेशे में महिलाओं की बुनियाद है। उनको सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन में भी सम्मान के साथ देखा जाता था। यह भी पढ़े: वीडियो: एक पैर से विकलांग होने के बावजूद भी देखें इस शख्स की मेहनत, रह जाएंगे हैरान लंदन के प्रतिष्ठित लिंकन इन में शामिल हुआ नाम- समाज सुधार और कानूनी कार्य के अलावा उन्होने अनेकों पुस्तकों, लघुकथाओं एवं लेखों की रचना भी कीं। उन्होंने दो आत्मकथाएं- इंडिया कॉलिंग (1934) और इंडिया रिकॉल्ड (1936) भी लिखी हैं। 2012 में, लंदन के प्रतिष्ठित लिंकन इन में उनके नाम को शामिल किया गया। NOTE: संजीवनी टुडे Youtube चैनल सब्सक्राइब करने के लिए क्लिक करे ! जयपुर में प्लॉट ले मात्र लाख में: 09314188188

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