Saturday , Nov 25 2017

लोकप्रिय ख़बरें

राजधानी में डेंगू: दस साल में सबसे ज्यादा खतरनाक हालात, वार्डों में नहीं बची जगह

Rajasthan Patrika
15, Nov 2017, 05:30

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में डेंगू का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है, हर रोज डेंगू के दर्जनभर से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। शहर के हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। 128 टीम इसे को रोकने मैदान में जुटी हुई हैं इसके बावजूद कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। शहर में डेंगू के मरीजों की संख्या 900 के करीब हो गई है। स्थिति यह है कि बीते दस सालों में यह सबसे खतरनाक हालात हैं। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के दो दर्जन से ज्यादा क्षेत्रों में डेंगू खतरानाक रूप ले चुका है। विशेषज्ञों की माने तो इस स्थिति का सबसे बड़ा कारण इन क्षेत्रों में नियंत्रण कार्यक्रम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहना है। 128 टीम में से इक्का-दुक्का टीम ही मैदान में नजर आती हैं। दो दिन में घर भेज रहे मरीजों को:डेंगू मरीजों की संख्या को देखते हुए वार्ड अब छोटे पडऩे लगे हैं। वार्डों में जगह नहीं होने के चलते भर्ती मरीजों को दो दिन में डिस्चार्ज कर घर भेजा जा रहा है ताकि नए मरीजों को भर्ती किया जा सकें। आधा-अधूरा इलाज मिलने के कारण कई मरीजों को गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा।देर से जागने का नतीजा:विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार डेंगू के इस विकराल रूप के पीछे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। पूर्व मलेरिया अधिकारी डॉ. पद्माकर त्रिपाठी के मुताबिक ऑफ सीजन में ही डेंगू लार्वा सर्वे का काम शुरू हो जाना चाहिए ताकि उन्हें बढऩे से रोका जा सके, लेकिन इस बार डेंगू फैलने के बाद अमला सक्रीय हुआ है। यहां समझें कहां-कितने मरीज :साकेत नगर - 46, शक्ति नगर 25, पिपलिया पेंदे खां 18, गौतम नगर 07, बुधवारा 21,कोहेफिजा 15अयोध्या नगर 32राजीव नगर 13बसंत कुंज 09पिपलानी 12अवधपुरी 08बरखेड़ा पठानी 16कोटरा सुल्तानाबाद 18शिवाजी नगर 17तुलसी नगर 08होशंगाबाद रोड 23अरेरा कॉलोनी 48टीटी नगर क्षेत्र 21माता मंदिर 19पुराना शहर 17लालघाटी 09कोलार 30बीते आठ सालों में शहर में डेंगू की स्थितिवर्ष - मरीज - मौत2009 228 022010 79 002011 06 002012 30 002013 165 002014 706 142015 57 042016 758 122017 900 04 चिकनगुनिया भी पीछे नहीं-सिर्फ डेंगू ही नहीं चिकनगुनिया भी लोगों को परेशान कर रहा है। सितंबर में चिकनगुनिया का पहला मरीज सामने आया जो बढ़कर तीन सौ से ज्यादा हो गए हैं। यह पहला मौका है जब चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या सैंकड़ा में पहुंची हो। ये है डेंगू और चिकनगुनिया से बचने के उपाय:चिकनगुनिया और डेंगू एक खतरनाक वायरल रोग है जो की संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। अकेला एक संक्रमित मच्छर ही अनेक लोगों को डेंगू या चिकनगुनिया रोग से ग्रसित कर सकता है। अपने घर के हर कोने-कोने में साफ-सफाई रखें और गंदे पानी को एक जगह जमने न दें। रात में सोते वक्त मच्छरदानी, क्वाइल इत्यादि का जरूर प्रयोग करें। याद रखें डेंगू की कोई विशिष्ट चिकित्सा अभी तक उपलब्ध नहीं है। सिर्फ शुरुआती लक्षणों के वक्त ही इलाज कर व्यक्ति को बचाया जा सकता है। बुखार कैसा भी हो इन दिनों में यदि जल्दी आराम ना मिले तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और मच्छरों से बचाव एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढायें। यही डेंगू से बचने का सबसे अच्छा उपाय है।डेंगू बुखार के लक्षण:bull; ठंड के साथ अचानक तेज़ बुखार होना।bull; सरदर्द, गले में दर्द, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना। bull; अत्यधिक कमजो़री महसूस होना और भूख कम लगना। bull; शरीर पर ददोरे पड़ना। डेंगू का उपचार :bull; सामान्य बुखार की स्थिति में पैरासिटामाल दिया जा सकता है।bull; शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित रखने का हर संभव प्रयास करें और इसके लिए आप फलों का जूस भी ले सकते हैं।bull; संतरे के जूस के सेवन से पाचनतंत्र ठीक रहता है और प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। bull; तुलसी और अदरक से बनी हरी चाय के सेवन से मरीज़ को अच्छा महसूस होगा और इसके स्वा स्य्के लाभ भी हैं। 3 दिन से अधिक समय तक बुखार रहने पर चिकित्सक से संपर्क ज़रूर करें। डेंगू से बचने के लिए ज़रूरी है मच्छरों से बचना जिनसे डेंगू वायरस; फैलता है। अपने घर, बच्चों के स्कूल और आफिस की साफ-सफाई पर भी नज़र रखें । याद रखें इलाज से बेहतर है रोग की रोकथाम।चिकनगुनिया -चिकनगुनिया उसी मच्छर के काटने से फैलता है जो डेंगू फैलाता है यानि एडिस एजिप्टी प्रजाति का मच्छर। चिकनगुनिया होने पर तेज बुखार , जोड़ों में तेज दर्द और जकड़न , सिर दर्द , थकान , घबराहट और स्किन रेशेज हो सकते है। शुरुआत बुखार और जॉइंट पेन से होती है। मच्छर के काटने के बाद 4 से 7 दिन के अंदर इसका असर दिखना शुरू हो जाता है।इसके लक्षण बहुत कुछ डेंगू जैसे ही होते है। एक समय था जब चिकन गुनिया को डेंगू ही समझा जाता था। इसमें और डेंगू में समानता की वजह से कई बार समझने में भूल हो जाती है और पता नहीं चल पाता की चिकनगुनिया है या डेंगू। चिकनगुनिया डेंगू जितना खतरनाक और घातक नहीं होता है। चिकनगुनिया और डेंगू दोनों साथ मे भी हो सकते है। कभी कभी इनमे और मलेरिया में भी कंफ्यूजन हो जाता है।चिकनगुनिया से बचने का तरीका ndash; Chkanguniya Se Kaise Bache- चिकनगुनिया से बचने का तरीका यही है की मच्छर से बचा जाये। मच्छर की रोकथाम करने से ही चिकनगुनिया पर काबू पाया जा सकता है।- यदि थोड़ा सा भी पानी कहीं इकट्ठा है तो वहां मच्छर पनप सकते है। इसलिए बारिश के बाद आसपास पानी जमा ना हो इसका ध्यान रखें।- टायर , बोतल , कूलर , गमले आदि में बारिश का पानी जमा हो गया है उसे सुखाएं। कूलर का पानी बदलते रहें ताकि उसमें मच्छर पैदा ना हों पाये। यदि पानी सूखा ना सकें तो वहाँ थोड़ा मिट्टी का तेल डाल दे इससे मच्छर पैदा नहीं होंगे। खुद का बचाव भी जरुरी है। इसके लिए मच्छरदानी , मच्छर वाली क्रीम ,आदि का उपयोग मच्छरों से बचने के लिए करना चाहिए। जहां तक संभव हो पूरा शरीर ढका रहे ऐसे कपड़े पहने। बाहर से मच्छर घर के अंदर ना आने पाये उसके लिए खिड़की पर जाली होनी जरुरी है। आसपास तुलसी के पौधे लगाएं। तुलसी के कारण मच्छर के लार्वा नष्ट हो जाते है। घर के अंदर कपूर जलाकर इसकी धुआं सब तरफ करें । इसकी गंध मच्छर को भगा देती है। नीम के तेल का दीपक जलाएं। जब तक दीपक जलेगा मच्छर नहीं आएंगे।

चर्चित खबरें

सुझाया गया

loading...

रेकमेंडेड आर्टिकल्स

ट्रेंडिंग वीडियो

loading...
© Copyright © 2017 Newsfiller All rights reserved