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किसान व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के फैसले के खिलाफ निकाली रैली

Rajasthan Patrika
15, Nov 2017, 06:31

खरगोन. केंद्र और राज्य सरकार के हर निर्णय ने किसानों और गरीबों की परेशानी ही बढ़ाई। सरकार अपनी योजनाओं को किसान हितैषी बताकर शुरू करती हैं, लेकिन इसका फायदा धनवान पूंजीपतियों को मिला। योजनाओं से सरकार चुनावी चंदा देने वाले धनपतियों को लाभ दे रही हैं। यह आरोप लगाकर कांग्रेसी नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया। मंगलवार को जिला कांग्रेस के किसान खेत-मजदूर विभाग ने आंदोलन किया। दोपहर करीब एक बजे शहर के अनाज मंडी परिसर से कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाल एसडीएम राजेंद्र सिंह को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें कांग्रेस कार्यकर्ता और किसानों ने जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए। यहां कसरावद विधायक सचिन यादव ने कहा कि केंद्र व राज्य की सरकार किसानों की अनदेखी कर रही हैं। भावांतर योजना से भ्रमित करना बंद कर सरकार समर्थन मूल्य तय करें। प्रधानमंत्री बीमा योजना में पिछले साल 55 करोड़ रुपए की बीमा राशि वसूली गई, जबकि फसलों के नुकसान के बाद भी किसानों को 55 लाख रुपए का मुआवजा भी नहीं मिला। थोपने के बजाए योजना को एच्छिक किया जाए। इस दौरान भीकनगांव विधायक झूमा सोलंकी, कांग्रेस महासचिव परसराम डंडीर, शिव तिवारी, भारत यादव, प्रीतमसिंह राठौड सहित अन्य मौजूद थे। किसानों को सिंचाई के लिए मिले पानी आंदोलन में भीकनगांव क्षेत्र के किसानों ने सिंचाई के लिए पानी दिए जाने की मांग रखी। किसानों ने जनप्रतिनिधियों के समक्ष ही अफसरों को खूब खरी-खोटी सुनाई। किसान बोले- हमें किसी भी कीमत पर छिर्वा तालाब से पानी दिया जाएं। पानी नहीं मिलने से फसल पैदा नहीं कर सकेंगे। किसान उत्पादन नहीं करेगा तो आप लोग क्या खाओगे। यह प्रमुख मांगे रखी मुआवजा - निमाड़ की मुख्य फसल कपास पर सितंबर माह में वर्षा से गुलाबी इल्ली का प्रकोप हुआ। करीब पचास प्रतिशत फसल खराब हो गई। मिर्च की फसल पर भी वायरस ने अटैक कर दिया। इस प्राकृतिक मार पर किसानों को अब तक कोईराहत नहीं मिली। कर्जमाफी - सरकार ने अब तक किसानों का कर्ज माफ नहीं किया हैं। राष्ट्रीयकृत बैंकों का 2 लाख 21 हजार रोड़ रुपए का ऋण केंद्र सरकार ने बैंकों को दिया। सरकार ने उद्योगपतियों का कर्जा माफ किया। किसानों के कर्ज को माफ कर उन्हें राहत दी जाएं। समान दाम गुजरात में मक्का 1 रुपए से दाम अधिक दर पर बिक रही हैं। वहीं कपास पर भी पांच सौ रुपए बोनस की घोषणा की गई हैं। गुजरात के किसानों को इन दोनों ही योजनाओं का लाभ मिल रहा हैं, जबकि प्रदेश के किसानों से इसमें भेदभाव हो रहा हैं।

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