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Nagaur.काम तो ऑनलाइन ही करना होगा वरना दूसरा काम तलाशो

Rajasthan Patrika
15, Nov 2017, 06:31

नागौर. खनन विभाग के तमाम प्रयासों के बाद भी 504 खान धारकों में से साढ़े तीन सौ ने ही अपनी एसएसओआईडी बनाई, शेष ने अभी भी इसे नहीं अपनाया;। नतीजन एक नवंबर से कागजी ई-रवन्ना जारी होने पर लगी रोक के बाद लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा खानधारकों के समक्ष स्थिति विकट हो गई है। विभागीय अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि काम करना है तो फिर ऑनलाइन होना पड़ेगा नहीं तो फिर वह दूसरा काम देख लें। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन होने से बचे खान धारकों को लिखित रूप से एसएसओआईडी की अनिवार्यता से अवगत करा दिया गया है। खनन विभाग के अनुसार जिले के नागौर खनि अभियंता क्षेत्र में कुल 504 खनन की खान है। मुख्यालय से आए फरमान के बाद छह माह पूर्व ही सभी खान धारकों को ऑनलाइन होने के लिए एसएसओआईडी बनाने की अनिवार्यता से लिखित में अवगत करा दिया गया। यही नहीं खनन विभाग की टीम ने खुद ही अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर खान धारकों से मुलाकात कर उनकी एसएसओआईडी बनाने में तकनीकी मदद भी की। तमाम प्रयास के बाद भी लगभग साढ़े तीन सौ खान धारकों की तो एसएसओआईडी बन गई, लेकिन अन्य ने इसमें रुची ही नहीं ली। हालांकि इन बचे हुए खान धारकों के पास भी संबंधित क्षेत्रों के अभियंता एसएसओआईडी बनवाने के लिए पहुंचे, लेकिन इसके बाद भी उनकी ओर से इसे बनवाने की जहमत नहीं उठाई। विभाग की ओर से स्थिति को देखते हुए इसके लिए 10 अक्टूबर तक का समय देने के साथ बता दिया गया कि वह ऑनलाइन नहीं हुए तो फिर काम नहीं कर पाएंगे। इसके बाद भी गत 31 अक्टूबर तक 150 से ज्यादा खान धारकों ने एसएसओआईडी बनाने से दूरी बनाए रखी, नतीजन विभाग ने एक नवंबर से खनन व इसके निर्गमन की पूरी गतिधियों को ऑनलाइन कर दिया, और कहा गया कि अब ई-रवन्ना होने पर ही निर्गमन हो सकेगा। खनि अभियंता की ओर से अब तक की गतिविधियों की पूरी रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी। तुलाधारकों की भी बनी एसएसओआईडीखनन विभाग के अनुसार अब तक 35 तुलाधारकों ने एसएसओआईडी बनाने के साथ ही अपना पंजीकरण कराने के साथ ही विभाग की अधिकृत वेबसाइट से जुड़ गए हैं। अब खनन सामग्री का मापन होते ही उसका पूरा विवरण ऑनलाइन प्रदर्शित होने लगता है। इससे विभाग को भी सामाग्री का पूरा विवरण अब ऑनलाइन ही मिलने लगा है। अधिकारियों का कहना है कि इस काफी हद तक फर्जी रवन्ना एवं अन्य अवैधानिक गतिविधियों पर रोक लग सकेगी।इनका कहना है...amp;तमाम प्रयासों के बाद भी लगभग साढ़े तीन सौ खान धारक एवं 35 तुलासंयन्त्र धारकों की एसएसओआईडी बन गई है। शेष को इसके लिए चेता दिया गया कि अब वह कागजी रवन्ना के मार्फत काम नहीं कर पाएंगे।सोहनलाल, खनि अभियंता नागौर

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