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भारत की वो महिला जिनके नाम प्रथम होने के कई रिकॉर्ड हैं, Google ने भी डूडल बनाकर किया सम्मानित

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15, Nov 2017, 07:01

userfilesdc(13).jpg कार्नेलिया सोराबजी का जन्म 15 नवम्बर 1866 को नासिक में हुआ। कार्नेलिया 1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गयीं और 1894 में भारत लौटीं। उस समय देश में महिलाओं को वकालत का अधिकार नहीं था, लेकिन अपनी काबिलियत की बदौलत उन्होंने महिलाओं को कानूनी परामर्श देना शुरू किया। कॉर्नेलिया ने लॉ की शिक्षा तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ले ली, लेकिन उन्हें महिला होने के कारण डिग्री नहीं मिली।
userfilesbv(11).jpg इस वजह से वे भारत लौ़ट आईं। यहां भी उनका बतौर महिला वकील काम करना लोगों को गवारा ना हुआ। कॉर्नेलिया अपने दम पर सरकार की कानूनी सलाहकार बनीं। 1907 के बाद कार्नेलिया को बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम की अदालतों में सहायक महिला वकील का पद दिया गया। 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून को शिथिल कर उनके लिए भी यह पेशा खोल दिया गया।
userfilestg(10).jpg 1929 में कार्नेलिया हाईकोर्ट की सीनियर एडवोकेट के तौर पर सेवानिवृत्त हुईं। 1954 में कार्नेलिया की मौत हो गई, लेकिन आज भी उनका नाम वकालत जैसे जटिल और प्रतिष्ठित पेशे में महिलाओं की बुनियाद माना जाता है।

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