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एक के बाद एक मेयर बदलते रहे, बस शहर के हालात नहीं बदले

Rajasthan Patrika
15, Nov 2017, 08:00

बरेली। नगर निगम बरेली में पहली बार 1989 में मेयर चुना गया था, तब से लेकर अब तक ये शहर पांच मेयर के कार्यकाल देख चुका है, लेकिन हालात तब जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं। इन समस्याओं से जनता को कोई राहत नहीं मिली है। अब एक बार फिर मेयर चुनने की बारी आ गई है। सभी पार्टियों के नेता जनता के बीच जाकर बड़े बड़े दावे कर रहे हैं। ऐसे में जनता संदेह के घेरे में है कि आखिर किसे अपना मेयर चुने जो उन्हें शहर की बुनियादी जरूरतों से छुटकारा दिला सके। आइए एक नजर डालते हैं शहर की बड़ी समस्याओं पर। कूड़े का अम्बार कूड़े का निस्तारण न होने के कारण बाकरगंज का ट्रंचिंग ग्राउंड फुल हो चुका है। यहां पर कूड़े के ऊंचे ऊंचे पहाड़ बन चुके हैं। इसके साथ ही अब शहर में कई जगहों पर अवैध डलावघर बन गए है, जहां पर कूड़ा इकट्ठा किया जा रहा है। इस कूड़े से फैलने वाली दुर्गंध और बीमारियों से बचाने के लिए लम्बे समय सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट प्लांट की मांग उठती रही है। बरेली में ये प्लांट लगा भी, लेकिन एनजीटी के आदेश पर बंद हो गया। अब नई जगह पर प्लांट बनाने की बात हो रही है। लेकिन धरातल पर अब तक कुछ होता नजर नहीं आ रहा। सुभाषनगर की पुलिया सुभाषनगर की पुलिया भी शहर की एक बड़ी समस्या है। यहां पर बरसात के दिनों में भीषण जलभराव होता है। यहां पर नाला चौड़ा जरूर किया गया, लेकिन शहर भर का पानी इसी नाले में आने के कारण नाला ओवरफ्लो हो जाता है और पूरी पुलिया पर जलभराव हो जाता है। रेलवे यहां पर ओवरब्रिज बना चुका है और इस नाले को मोड़ने का प्रस्ताव नगर निगम में लंबित पड़ा हुआ है। सीवर लाइन शहर के 40 फीसदी इलाके में 214 किलोमीटर लम्बी सीवरलाइन है जोकि 50 साल पहले बिछाई गयी थी। अब पुरानी होने की वजह से अक्सर जगह जगह पर धंस जाती है। केंद्र सरकार ने अमृत योजना के तहत पुरानी सीवर लाइन बदलने और नई लाइन डालने के लिए बजट जारी किया है। लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। अवैध बाजार और अतिक्रमण शहर में कई जगह पर अवैध बाजार लगते हैंं, जो समय के साथ साथ बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा दुकानदारों ने भी सड़कों और और नालों पर अतिक्रमण कर रखा है। जिला अस्पताल रोड पर अतिक्रमण के कारण अक्सर जाम लगता है, जिससे वहां पर कई बार एम्बुलेंस भी जाम में फंस जाती है। पुलिस और नगर निगम की मिलीभगत से यहां का अतिक्रमण नहीं हट पा रहा है जिससे लोगों को जाम सामना करना पड़ता है। अवैध डेयरियां शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 500 अवैध डेयरियां हैं, जिसमें हजारों पशु हैं। इन डेयरियों में पलने वाले जानवर सड़क पर गंदगी फैलाते हैं। वहीं डेयरियों से निकलने वाले गोबर को डेयरी मालिक नालियों में बहा देते हैं जिससे नाले चौक हो जाते हैं और जलभराव की समस्या उतपन्न हो जाती है। इन डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए प्लान कई बार बनाया गया लेकिन इस पर काम आज तक शुरू नहीं हो पाया। सार्वजनिक शौचालयों की कमी बरेली को बाजारों का शहर भी कहा जाता है, लेकिन इन बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या न के बराबर है। इससे व्यापारियों और खासतौर पर इन दुकानों में काम करने वाली महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तालाबों पर अवैध कब्जा नगर निगम के तालाबों पर कब्जे हो रहे हैं, लेकिन निगम के लोग आंख बंद कर बैठे हुए हैं। डेलापीर तालाब पर अवैध कब्जे का मामला तो अदालत तक पहुंच गया है, वहीं सिविल लाइंस के अक्षय बिहार तालाब पर भी अवैध कब्जा किया जा रहा है।

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