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ज़िम्बॉब्वे संकट: सउदी अरब की तर्ज पर तख्तापलट की साजिश, सेना का सरकारी चैनल और Airport पर कब्जा

Live India
15, Nov 2017, 08:01

userfilesone(3).jpg दरअसल, मुगाबे ने उपराष्ट्रपति के पद से जिस व्यक्ति को हटाया है वो 1970 के दशक में देश की स्वतंत्रता की लड़ाई के जाने-माने चेहरा रहे हैं। पार्टी ने कहा कि जनरल चिवेंगा की टिप्पणी राष्ट्रीय शांति को अस्थिर करने और बग़ावत को हवा देने के लिए है। उत्तराधिकारी की कलह मुकाबे की पार्ट्री ने एक बयान जारी करके कहा कि वह सैन्य धमकियों के सामने वो झुकेगी नहीं और राजनीति हमेशा बंदूक के ऊपर रहेगी। गौरतलब है कि मुगाबे ने पिछले हफ़्ते उपराष्ट्रपति को उत्तराधिकार की कलह को लेकर बर्खास्त कर दिया था। सेना का सरकारी चैनल और एयरपोर्ट पर कब्जा एक तरफ सेना तख्तापलट के प्रयास में जुटी हुई है तो दूसरी तरफ उसने सरकारी चैनल पर कब्जा कर लिया है। सेना ने बुधवार को सरकारी चैनल के माध्यम से जारी किए गए बयान में कहा कि वह अपराधियों को निशाना बना रही है। यह बयान सेना ने उस घटना पर जारी किया है जिसमें राष्ट्रपति निवास के समीम गोलीबारी की गई थी। साथ ही सेना ने कहा है कि राष्ट्रपति और उनके परिवार को कोई खतरा नहीं है। उनकी सुरक्षा की गारंटी हमारी है।
userfilesharara% सेना ने देश के मुख्य हरारे Airport पर भी कब्जा कर लिया है। इस Airport का नाम अभी बीते सप्ताह ही बदलकर रॉबर्ट मुगाबे इंटरनेशनल हवाई अड्डा किया गया था। वित्त मंत्री को सेना ने गिरफ्तार किया सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि मुगाबे के कुछ करीबियों के साथ-साथ देश के वित्त मंत्री को भी सेना ने गिरफ्तार कर लिया है। दूसरी तरफ दक्षिण अफ़्रीका में ज़िम्बॉब्वे के राजदूत ने देश में सत्ता परिवर्तन की ख़बरों को खारिज कर दिया था। आपको बता दें कि ज़िम्बॉब्वे में ये हालात तब पैदा हुए जब देश की सत्ताधारी पार्टी ने देश के सैन्य प्रमुख पर विश्वासघाती बर्ताव का आरोप लगाया है।
userfilestwo(2).jpg उत्तराधिकारी के रूप में ग्रेसी सत्ताधारी पार्टी ज़ानु-पीएफ़ के युवा मोर्चा के नेता कुदज़ी चिपांगा ने सेना के द्वारा तख्तापलट की साजिश की खबरों पर कहा, अगर चुनी हुई सरकार ख़तरे में आएगी तो हम हाथ पर हाथ रखकर बैठेंगे नहीं। पार्टी का युवा मोर्चा मुगाबे के उत्तराधिकारी के रूप में उनकी पत्नी ग्रेसी को देख रहा है। टर्की में भी हो चुका है ऐसा जिस तरह से इस समय जिम्बॉब्वे में सेना तख्तापलट का प्रयास कर रही है कुछ इसी तरह टर्की में भी सेना ने करने की कोशिश की थी। 15 जुलाई 2016 को रातों-रात सैनिकों के एक बड़े समूह ने तख्तापलट करने की कोशिश में कई जगह टैंक उतार दिए थे। कुछ जगहों पर हुई गोलीबारी में 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 1000 से भी ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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