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पार्षद बनने के लिए छुटभैया नेताओं ने निकाला शार्टकट फार्मूला

Rajasthan Patrika
15, Nov 2017, 08:30

इलाहाबाद. छुटभैया नेताओं ने पार्षद बनने का जैसे शार्टकट फार्मूला निकाल लिया हो। ऐसे छुटभैया नेताओं की होड़ बीजेपी से लेकर बसपा तक में नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने के बाद अब नगर निकाय चुनाव में पार्षद प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटे नजर आ रहे हैं। इलाहाबाद नगर निकाय चुनाव में ऐसे अवसरवादी छुटभैया नेताओं की होड़ है। जो पार्षद का चुनाव लड़ने से पहले विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। इसमें सबसे पहले वार्ड 44 राजरूपपुर के निर्दलीय पार्षद प्रत्याशी अखिलेश सिंह का नाम आता है। अखिलेश सिंह राजरूपपुर के पूर्व पार्षद रह चुके हैं। बाद में उन्होंने विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई। जहां उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। फिर उन्होंने बीजेपी का दामन पकड़ा। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में शहर पश्चिमी विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी रहे सिद्धार्थनाथ सिंह का जमकर प्रचार किया। जिसके कारण बीजेपी ने उन्हें वार्ड 45 से पार्षद प्रत्याशी का टिकट दे दिया। हालंाकि अखिलेश वार्ड 44 से लड़ना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने बीजेपी का टिकट ठुकरा दिया और वार्ड 44 में बीजेपी से बगावत कर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतरे हैं। पार्टी ने भले ही बगावत करने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का ऐलान किया हो लेकिन अखिलेश पर स्वास्थ्यमंत्री सिद्धार्थनाथ सिह की कृपा दृष्टि बनी हुई है। ऐसे में अखिलेश अब भी पार्टी में बने हुए हैं। इसी प्रकार नगर निकाय चुनाव में महापौर का टिकट मांगने वाले 52 उम्मीदवारों में एक नाम रतन कुमार दीक्षित का भी था। इन्होंने भी बीजेपी से महापौर का टिकट मांगा था। लेकिन बीजेपी ने अभिलाषा गुप्ता नंदी को टिकट देकर दर्जनों उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ऐसे में पार्टी ने रतन दीक्षित को वार्ड 19 से पार्षद प्रत्याशी का टिकट देकर खुश किया। टिकट के लिए कांगे्रस छोड़ गए बसपा में पिछले काफी समय से श्रीश चंद्र दुबे कांगे्रस कार्यकर्ता के रूप में नजर आए। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस से टिकट भी मांगा था। लेकिन कांग्रेस से उन्हें टिकट नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय ही मैदान में उतरने का निर्णय लिया। हालांकि बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। इस बाद नगर निकाय चुनाव में भी कांग्रेस में दाल नहीं गलती देख। उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया। बसपा ने उन्हें अपना पार्षद प्रत्याशी घोषित किया है।

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