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मुलायम के गढ़ में सीएम योगी का अखिलेश व जनता को झटका, नहीं किया यह काम

Rajasthan Patrika
07, Dec 2017, 11:30

आजमगढ़. यूपी में सत्ता परिवर्तन के बाद किसी के अच्छे दिन आए हो या न आए हों, लेकिन आजमगढ़ के बुरे दिन की शुरूआत हो गई है। योगी सरकार ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में ग्रहण लगा दिया है। खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है। करोड़ रूपये खर्च होने के बाद भी परिवहन विभाग सड़क पर है और आम आदमी की सांसें प्रदूषण और आवाज से घुंट रहीं हैं। विभाग के लोग धन न होने का रोना रो रहे और सरकार चुप्पी साधे हैं। परिणाम है कि, आए दिन बवाल हो रहा है। निजी वाहन संचालक रोडवेज के बीच में अपना वाहन खड़ा कर सरकार को चूना लगा रहे हैं। बता दें कि, आजमगढ़ सपा के पूर्व मुखिया मुलायम सिंह यादव का संसदीय क्षेत्र है। वर्ष 2012 में सत्ता में आने के बाद अखिलेश यादव ने पिता का संसदीय क्षेत्र होने के कारण आजमगढ़ का काफी ध्यान रखा। सठियांव चीनी मिल, कलेक्ट्रेट भवन और आधुनिक रोडवेज का निर्माण अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था। चीनी मिल और कलेक्ट्रेट भवन तो सपा सरकार में ही बनकर तैयार हो गया, लेकिन रोडवेज का निर्माण पूरा नहीं हो सका। रोडवेज का निर्माण करोड़ की लागत से 01 लाख 20 हजार स्वाक्यार मीटर क्षेत्र में होना था। इस दो मंजिला भवन की डिजाइन काफी आकर्षक थी। अर्धचन्द्रकार में बने दोनों भवनों के बाहरी व अंदर का डिजाइन जिस हिसाब से तैयार की गई माना जा रहा था कि, शायद प्रदेश में इससे बेहतर रोडवेज नहीं होगा। भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। यहां बाल्बो के छ: व साधारण बसों के 14 प्लेटपफार्म बनाए जाने हैं। रोडवेज में बैंक, एटीएम, शापिंग माल, पुलिस चैकी आदि की भी व्यवस्था की गई है। वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद योगी सरकार बनी तो लगा प्लेटफार्म के निर्माण के साथ ही पुराने भवनों को गिराने का काम जल्द शुरू हो जायेगा, लेकिन सरकार ने आठ महिना पूरा कर लिया है। अब तक यहां काम ठप पड़ा है। प्लेटफार्म तो दूर अभी मिट्टी पाटने का काम भी शुरू नहीं हो सका है। हालत यह है कि, रोडवेज की सारी बसें सड़क पर खड़ी होती हैं। जिसके कारण पूरे दिन रोडवेज सिविलाइन्स क्षेत्र में जाम लगा रहता है। निजी बस संचालक सरकारी बसों के बीच अपना वाहन खड़ा कर विभागीय मिलीभगत से सवारी भरते हैं। जाम और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। लोग विरोध करते हैं तो रोडवेज के कर्मचारी मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। आरएम और एआरएम शिकायतों के प्रति गंभीर नहीं है। इनका दो टूक कहना है कि, जब सरकार बनवाकर हमें हैंडओवर कर देगी तो हम सड़क खाली कर देंगे। हालत यह है कि, रोडवेज लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। सरकार धन कब देगी या पुरानी बिल्डिंग टूटेगी भी या नहीं यह बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। कारण कि, विभाग को सड़क से बसों के संचालन में लाभ दिख रहा है। कारण कि, इन्हें न तो परिसर की सफाई करानी है और ना ही पूछताछ पर बैठकर समय बर्बाद करना है उपर से कमीशनखोरी का पूरा मौका मिल रहा है। input- रणविजय सिंह

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