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डोकलाम विवाद के बीच धोखेबाजी पर उतरा नेपाल, लगाया भारत के बड़े प्रोजेक्ट पर अड़ंगा

Live India
13, Aug 2017, 02:30

(288).jpg 393 दरअसल, कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की थी कि 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के चलते ऐवरेस्ट की ऊंचाई पर असर पड़ा है। इन चिंताओं के मद्देनजर सर्वे ऑफ इंडिया ने ऐवरेस्ट की ऊंचाई को फिर से मापने का फैसला किया। 1767 में स्थापित हुआ सर्वे ऑफ इंडिया अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रॉजेक्ट को पूरा करके इस मौके को यादगार बनाना चाहता था। ऐवरेस्ट नेपाल और चीन की सीमा पर है। ऐसे में इस प्रॉजेक्ट में नेपाल का सहयोग लेना स्वाभाविक था। सर्वे ऑफ इंडिया ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस सिलसिले में एक प्रस्ताव भेजा। नेपाल को प्रस्ताव भेजे तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन सर्वे ऑफ इंडिया को अभी तक नेपाल के जवाब का इंतजार है। सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया मेजर जनरल वीपी श्रीवास्तव ने कहा, विदेश मंत्रालय के जरिए नेपाल को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अभी तक हमें कोई जवाब नहीं मिला है। इस मिशन में फिलहाल कोई प्रगति नहीं हो पाई है।
(156).jpg 393 श्रीवास्तव से पहले इस पद पर रहे स्वर्ण सुब्बा राव ने यह प्रस्ताव तैयार किया था। उन्होंने कहा, भारत और चीन के बीच जारी तनाव को देखते हुए नेपाल जवाब देने में काफी वक्त ले रहा है। नेपाल की अपनी चिंताएं हैं। ऐसे वक्त में जब भारत और चीन जैसे उसके दो बड़े पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर है, नेपाल नहीं चाहता कि वह किसी भी प्रॉजेक्ट में भारत के साथ खड़ा नजर आए।जनरल श्रीवास्तव भी इस बात का समर्थन करते हुए कहते हैं, चूंकि अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नेपाल की ओर से इस संबंध में नहीं दी गई है, इसलिए मैं आधिकारिक तौर पर नेपाल की चुप्पी के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन बॉर्डर पर जो हालात हैं उससे कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि नेपाल की चिंताएं क्या हैं और वह अभी स्थिति पर नजर रखे हुए है। जानकार बताते हैं कि नेपाल और भारत के बीच रिश्ते पिछले कुछ सालों में बदले हैं, दोनों देशों के बीच कुछ मसलों को लेकर विवाद हुए हैं, जिसका फायदा उठाते हुए चीन हिमालय क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर ऐवरेस्ट की लंबाई 8848 मीटर है। 1955 में सर्वे ऑफ इंडिया ने इसे नापा था और नेपाल ने भी इसे मान्यता दी थी। सर्वे ऑफ इंडिया को लगता है कि ऐवरेस्ट की ऊंचाई को फिर नापना उसके लिए गर्व की बात है। इसके नतीजों की मदद से भू-वैज्ञानिकों को भूकंप की भविष्वाणी और टेकटोनिक प्लेट्स के मूवमेंट को समझने में मदद मिलती। सर्वे ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने बताया, इस प्रॉजेक्ट की लागत 5 करोड़ रुपए आने का अंदाजा है, जो विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय द्वारा मुहैया कराया जाएग। इसके तहत 30 लोगों की टीम काम करेगी जिनमें कुछ शेरपा भी शामिल होंगे। नेपाल की ओर से भी सर्वेयर रखे जाएंगे।

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