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दुनिया का अकेला मंदिर, जहां आधी रात को नहीं, दिन में होता है कान्हा का जन्मोत्सव

Live India
13, Aug 2017, 04:30

470 दरअसल, मंदिर में ठाकुर राधारमणलाल जू का श्रीविग्रह है। सेवायत पदमलोचन गोस्वामी बताते हैं कि राधारमण लाल जू के प्राकट्यकर्ता आचार्य गोपाल भट्ट को वैशाख पूर्णिमा को भोर में चार बजे स्वप्न आया कि उनके आराध्य सालिगराम ने पूर्णरूप आकार ले लिया है। आचार्य भट्ट ने जब सुबह उठकर आराध्य सालिगराम के दर्शन किए तो उनका स्वरूप पूर्ण श्रीविग्रह में तब्दील हो चुका था। तभी से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मंदिर में दिन में मनाने की परंपरा शुरू हो गई।
525 दो घंटे होगा महाभिषेक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मंगलवार को राधारमण मंदिर में ठाकुरजी के श्रीविग्रह का सुबह नौ से 11 बजे तक महाभिषेक कराया जाएगा। जन्मोत्सव के बाद ठाकुर जी को काले तिल और मिगीपागका प्रसाद अर्पित किया जाएगा।
355 गोस्वामी ने बताया कि जिस समय ठाकुरजी का प्राकट्य हुआ था, उस समय आचार्य गोपाल भट्ट के पास तिल ही थे, जिसका प्रसाद उन्होंने ठाकुरजी को अर्पण किया। तभी से जन्मोत्सव पर ठाकुरजी को तिल का प्रसाद लगाया जाता है। इसके साथ मिगी पाग का भी भोग लगाया जाता है।दर्शन को आए, कान्हा साथ लाए इस बीच मथुरा से भी रोचक खबर है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की छवि कुमारी इस साल दादी बन गई हैं। पिछले साल उन्होंने जन्माष्टमी का व्रत रख कामना की थी कि पोता हो जाए तो वह अपने आराध्य को ब्रज दर्शन कराने ले जाएंगी। वह अब अपने बाल गोपाल को टोकरी में विराजमान कर मंदिर-मंदिर दर्शन करा रही हैं। वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा करा चुकी हैं। सोमवार को गिरिराज परिक्रमा कराएंगी।

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