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इस मंदिर में आपस में बातें करती हैं मां की मूर्तियां, जाएं और खुद सुनें...

Live India
13, Aug 2017, 05:30

(3).jpg 350 मंदिर में स्थापित हैं माता की कई मूर्तियां मंदिर में प्रधान देवी राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी के अलावा बंगलामुखी माता, तारा माता के साथ दत्तात्रेय भैरव, बटुक भैरव, अन्नपूर्णा भैरव, काल भैरव व मातंगी भैरव की प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर में काली, त्रिपुर भैरवी, धुमावती, तारा, छिन्न मस्ता, षोडसी, मातंगड़ी, कमला, उग्र तारा, भुवनेश्वरी आदि दस महाविद्याओं की भी प्रतिमाएं हैं, जिस कारण तांत्रिकों की आस्था इस मंदिर के प्रति अटूट है। लगभग वर्ष पहले हुई थी मंदिर की स्थापना प्रसिद्ध तांत्रिक भवानी मिश्र द्वारा लगभग वर्ष पहले इस मंदिर की स्थापना की गई थी। तब से आजतक इस मंदिर में उन्हीं के परिवार के सदस्य पुजारी बनते रहे हैं। तत्कालीन पुजारी किरण शंकर प्रकाश ने बताया कि इस मंदिर में कलश स्थापना का विधान नहीं है। तंत्र साधना से ही यहा माता की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। तांत्रिक कारणों से ही यहां कलश स्थापित नहीं होता है। भक्त यहां सप्तशती का पाठ कर मन्नत मांगते हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर में सूखे मेवे का प्रसाद ही चढ़ाया जाता है।

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